Shri Ramdarbar

Wednesday, November 23, 2011

"चार महिलाए"

सबको राम राम......

ज्ञानशिला टाउनशिप में अपने फ्लैट बनने की तरक्की को देखने गया था...वहाँ प्रवेशद्वार पर महिलाये गड्ढा खोद रही थी...उनसे बातचीत से पता हुआ कि यहाँ टाउनशिप के प्रवेश द्वार के पास मंदिर बनेगा...मंदिर बनने का जानकर अच्छा लगा...उनके क्रियाकलाप को देखने लगा...सबसे अच्छी और प्रभावित करने वाली बात उनकी हँसी थी...बात भी करती जाती और काम भी...यही कहने की छोटी सी कोशिश  है.....

"चार महिलाए"

गीली मिट्टी खोदती है,
चार महिलाए,
बातें भी करती जाती,
ये चार सबलाए|१|
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उनमे से एक कहती,
पैसे मिले तो काम करो,
नही तो, नही बोल दो,
फ़ोकट में यूँ न मरो|२|
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गड्ढा करने का काम मिला,
मंदिर की नीवं का,
पहले इससे और काम था,
भरण-पोषण करती है ऐसे जीव का|३|
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हँसती-मुस्कुराती, करती काम,
दिखता न दिल का दुःख,
मगन काम-बात में,
शायद इसी में मिलता सुख|४|
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कितने ही काम करती,
यह उदाहरण है बस एक
जीविका चलाने को,
ढुंढें-देखे तो मिलेंगे अनेक|५|
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ललित कर्मा
२५/०९/२०११ २:१० pm

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